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Sunday, June 12, 2016

आपका जीवन साथी कैसा होगा तो कुण्डली से आपको इसका उत्तर मिल सकता है

विवाह संस्कार से न केवल स्त्री और पुरूष का मिलन होता है, बल्कि एक नई जिन्दगी का आगाज़ भी होता है। वैवाहिक जीवन की सफलता के लिए आवश्यक है कि आपका #जीवनसाथी आपके अनुकूल हो। अगर आप जानना चाहते हैं कि आपका जीवन साथी कैसा होगा तो कुण्डली से आपको इसका उत्तर मिल सकता है।
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Friday, August 21, 2015

जन्मपत्रिका – जन्मकुंडली, जन्म राशि, जन्मपत्रिका ज्योतिषशास्त्र

जन्म कुंडली- अपने और अपने जीवन के बारे में पता करने का सबसे अच्छा तरीका है। किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली जन्म के समय ‘आकाश के नक्शे’ की तरह है। इसलिए जन्म के समय राशि चक्र में ग्रहों की स्थिति का व्यक्ति के जीवन पर प्रबल प्रभाव पड़ेगा। इसे ज्यादातर जन्मकुंडली के नाम से जाना जाता है। दूसरे नाम मूलांक और जन्मकाल भी हैं। जन्मकुंडली में सबसे पहले व्यक्ति के जन्म के समय का आर.ए.एम.सी. (Right Ascension of Meridian Cusp) की गणना की जाती है। इसके बाद स्थानीय समय पर आधारित जन्मकाल का लग्न तय किया जाता है। इन सबके बाद दिए हुए घर प्रणाली के आधार पर घरों की गणना की जाती है।

एक बार जब जन्म कुंडली तैयार हो जाए तो जन्म के समय ग्रहों की स्थिति की गणना करके उसे जन्मकुंडली में डाल दिया जाता है। वैदिक ज्योतिष में सारणी, अन्य प्रभागीय चार्ट और दशा भुक्ति की भी गणना की जाती थी जिसे व्यापक रूप से ग्रहों की अवधि के रूप में जाना जाता है। कुंडली तैयार है और अब भविष्य के बारे में बताया जा सकता है।

यहां आपको आश्चर्य हो सकता है कि जन्मकुंडली का लाभ क्या है? खैर, यह आपका सिर से पांव तक वर्णन करता है। ग्रहों की कोडित भाषा आप के भीतर और बाहर क्या है इसके बारे में संकेत देता है। यह व्यक्ति से संबंधित कुछ भी नापने का पैमाना है। संक्षेप में जन्मकुंडली व्यक्ति को भीतर बाहर जानने का एक शक्तिशाली उपकरण है। यदि आप उस व्यक्ति को अच्छी तरह जानते हैं तो आपको यह पता होगा कि उसके साथ आपको कैसा व्यवहार करना है और आप उस व्यक्ति को कैसे संभाल सकते है। कभी कभी, हम एक व्यक्ति से उसकी क्षमता से परे की उम्मीद कर लेते हैं। इससे दोनों को वैमनस्य और निराशा हो सकती है। लेकिन हम जन्मकुंडली से उस व्यक्ति का उज्ज्वल और कमजोर पक्ष जान सकते हैं और फिर उसके अनुसार बर्ताव कर सकते हैं। एक बेहतर और स्वस्थ समाज का विचार है, जो तभी संभव हो सकता है जब हमें व्यक्ति के सामर्थ्य का पता हो।

जन्मकुंडली जीवन की संभावित घटनाओं पर आधारित है। कुंडली इस बात की भविष्यवाणी करती है कि आपके भाग्य में क्या है और क्या नहीं है।जैसे कि, अगर कोई व्यक्ति किसी भी तरह की मास्टर डिग्री प्राप्त नहीं कर रहा है (जन्म कुंडली में उच्च शिक्षा 9वें घर में आता है), यहां तक कि ग्रहों की सर्वोत्तम गति या दशा भुक्ति कोई सहायता नहीं कर सकता। यदि ग्रहों की गति को जन्म के समय ग्रहों की अनुपस्थिति में देखा जाता है तो भविष्यवाणी गलत हो जाएगी। कुछ लोग जो लग्न की स्थिति पर विचार कर भविष्यवाणी शुरू कर देते हैं वे पूरी तरह से गलत हो सकते हैं। ग्रहों की स्थिति के साथ जन्म कुंडली को आपके लिए संभावित चीजों और परिस्थितियों के बुनियादी कारकों की आवश्यकता होती है।

जन्मकुंडली एक शक्तिशाली उपकरण है जिसपर यदि आप विश्वास करते हैं तो यह जीवन में सही दिशा चुनने में आपकी मदद कर सकती है। और यदि आप पहले से ही सही रास्ते पर हैं, तो जन्मकुंडली का पालन करके आसानी और ख़ुशी से लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। जन्मकुंडली को जानना खुद को बहुत अच्छी तरह से जानने के बराबर है।

भारतीय ज्योतिष शास्त्र – चंद्र ज्योतिषशास्त्र, चंद्र राशिफल, चंद्र राशि कुंडली

भारतीय ज्योतिष को चन्द्र ज्योतिष भी कहते हैं, इसकी उत्पत्ति वेदों से हुई है। भारतीय ज्योतिष में १२ राशियां हैं –
  • मेष
  • वृष
  • मिथुन
  • कर्क
  • सिंह
  • कन्या
  • तुला
  • वृश्चिक
  • धनु
  • मकर
  • कुंभ
  • मीन
राशियां बाद में विकसित हुई थीं. भारतीय ज्योतिष का आधार नक्षत्र हैं. कुल २७ नक्षत्र हैं. २८ वां नक्षत्र अभिजीत है जिसे कुंडली अध्ययन के समय शामिल नहीं किया जाता है।

वेद और शास्त्रों के अनुसार ५ तत्व माने गए हैं-
  • अग्नि
  • जल
  • पृथ्वी
  • वायु
  • आकाश
कुंडली अध्ययन के समय इन पांचों तत्वों के साथ ही नक्षत्र और राशियों को ध्यान में रखा जाता है। गगन या आकाश तत्व को सर्वाधिक महत्त्व दिया जाता है। किसी की भी कुंडली में लग्न सबसे प्रभावी माना जाता है, क्योंकि यह ‘स्व’ को सूचित करता है और इसपर आकाश तत्व का आधिपत्य होता है।

भारतीय ज्योतिष पद्धति नक्षत्र पर आधारित कैलेंडर का अनुसरण करता है। इसके केंद्र में चन्द्रमा होता है। चन्द्रमा मष्तिष्क और भावना पर नियंत्रण रखता है। राशियों में चन्द्रमा सबसे तेज चलनेवाला ग्रह है और इसके समर्थन के बिना कोई कार्य संभव नहीं हो सकता। जो पाश्चात्य ज्योतिष का ज्ञान रखते हैं उन्हें यह पता होगा कि वहां ‘वोईड ओफ़ कोर्स’ का सिद्धांत चलता है। इसका मतलब है कि यदि चन्द्रमा का कोई स्थान नहीं हो तो कोई भी कार्य संपन्न नहीं होता। वैसे तो सभी ग्रह समान रूप से महत्व रखते हैं लेकिन चन्द्रमा को प्रमुख इसलिए माना जाता है क्योंकि यह मष्तिष्क का नियंत्रक है।

दशा पद्धति – वैदिक ज्योतिष का एक प्रमुख भाग
जन्म की राशि, डिग्री, मिनट और सेकण्ड को भारतीय ज्योतिष में दशा माना जाता है जो व्यापक रूप से ग्रहों की अवधि के रूप में जाने जाते हैं। ये बाद में भी फ़ारसी ज्योतिष प्रणाली‘अल फिरदेरिया’ या ‘फिरदर’ के रूप में पाए गए। भारतीय ज्योतिष इसे बहुत सरल बनाता है क्योंकि हर चीज को समय के सूक्ष्म हिस्से में बांटा जा सकता है। ज्योतिष की सभी पद्धतियों में से भारतीय पद्धति में ही समय को सूक्ष्मतम इकाई में बांटने की क्षमता है, इसी कारण से यह अधिक सटीक माना गया है।

दशा पद्धतियां कई हैं पर उनमें से दो बहुत प्रचलित थीं- अष्टोत्तरी और विंशोत्तरी लेकिन समय के साथ विंशोत्तरी दशा पद्धति ने सभी दशा पद्धतियों को आत्मसात कर लिया। विंशोत्तरी पद्धति ‘ट्राईन आस्पेक्ट्स्’ पर आधारित है। ट्राईन ऊर्जा उत्पन्न करता है और यह भाग्य पर नियंत्रण रखता है। इसलिए किसी के अच्छे या बुरे समय के बारे की भविष्यवाणि के लिए विंशोत्तरी सर्वश्रेष्ठ दशा पद्धति है।

ग्रहों की गति
वैदिक पद्धति में ग्रहों की गति को महत्व दिया जाता था क्योंकि वहां दशा पद्धति थी। बहुत से ज्योतिष दशा और गति को एकसाथ नहीं मिलाते क्योंकि ऐसा करना आवश्यक नहीं है।

वार्षिक भविष्यवाणी
वर्ष फल ताजिक नीलकंठ ने प्रारंभ किया था, बाद में वे भारतीय ज्योतिष का अनिवार्य अंग बन गए। पाश्चात्य ज्योतिष जो चन्द्रमा ज्योतिष की तरह ही है, इसमें एक विशेषता होती है जिसे ‘सोलर रिटर्न’ कहते हैं। लेकिन भारतीय ज्योतिष पद्धति स्नेह और वैरा दृष्टि जैसे पक्षों पर आधारित कई मापदंड हैं। इसी तरह, पश्चिमी सोलर रिटर्न में वे भाग्य और सफलता के हिस्से के लिए बहुत महत्व देते हैं. उसी प्रकार वहां चन्द्रमा ज्योतिष प्रणाली मेंसहम्स वार्षिक भविष्यवाणि में एक मुख्य भूमिका निभाता है। वर्षफल पद्घति में मुन्था का भी एक बहुत अच्छा भविष्य है।

संक्षेप में, भारतीय ज्योतिष, इस महान और सटीक ज्योतिष विज्ञान के गहरे ज्ञान से बना हुआ है जो भविष्य के बारे में पहले ही बता सकता है और समस्याएं पैदा होने से पहले सावधानी बरत लेता है।

Friday, August 14, 2015

Swapnil Best astrologer in bhopal

Swapnil - THE BEST ASTROLOGER IN Bhopal INDIA.

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Thursday, August 13, 2015

कुंडली के बारह भाव में गुरु का फल

1. जिस जातक के लग्न में गुरु (बृहस्पति) होता है। ऐसा जातक अपने गुणों से चारों ओर आदर की दृष्टि से देखा जाता है। 

 2. दूसरे भाव में हो तो जातक कवि होता है। उसमें राज्य संचालन करने की शक्ति हो‍ती है।

 3. तीसरे भाव में हो तो वह जातक नीच स्वभाव का बना देता है। साथ ही उसे सहोदर भ्राताओं का सुख भी प्राप्त होता है। 

 4. चौथे भाव में हो तो व्यक्ति लेखक, प्रवासी, योगी, आस्तिक, कामी, पर्यटनशील तथा विदेश प्रिय तथा महिलाओं के पीछे-पीछे घूमने वाला होता है। 


5. पांचवे भाव में हो तो ऐसा जातक विलासी तथा आराम प्रिय होता है। 


6. छठे भाव में हो तो ऐसा जातक सदा रोगी रहता है। मुकदमें आदि में जीत हासिल करता है। तथा अपने शत्रुओं को मुंह के बल गिराने की क्षमता रखता है। 


7. सातवें भाव में हो तो बुद्धि श्रेष्ठ होती है। ऐसा व्यक्ति भाग्यवान, नम्र, धैर्यवान होता है। 


8. आठवें भाव में हो तो दीर्घायु होता है तथा ऐसा जातक अधिक समय तक पिता के घर में नहीं रहता है। 


9. नौवें भाव में हो तो सुंदर मकान का निर्माण करवाता है। ऐसा जातक भाई-बंधुओं से स्नेह रखने वाला होता है तथा राज्य का प्रिय होता है। 


10. दसवें भाव में हो तो जातक को भूमिपति एवं भवन प्रेमी बना देता है। ऐसे व्यक्ति चित्रकला में निपुण होते है। 


11. ग्यारहवें भाव में हो तो जातक ऐश्वर्यवान, पिता के धन को बढ़ाने वाला, व्यापार में दक्षता लिए होता है। 


12. बारहवें भाव में हो तो ऐसा जातक आलसी, कम खर्च करने वाला, दुष्ट स्वभाव वाला होता है। लोभ‍ी-लालची भी होता है।

जन्म समय से उपयोग में लाये जाने वाले कारक

सही जन्म समय के मिलने के बाद लगन को सही बनाया जा सकता है लगन के अंशों के अनुसार अन्य भावों के बल का रूप समझा जाता है,सही जन्म समय होन से नवांश दसवांश आदि के लिये सही जानकारी मिल जाती है और सूक्ष्म से सूक्षम विवेचन करने और घटना को सही बताने के लिये मुख्य माना जाता है,अक्सर लोग अपने जन्म समय को नही जानते है और अपने परिवार के सदस्य के द्वारा बताये गये जन्म समय पर अटक जाते है और यह कहते है कि वह समय बिलकुल सही है उसके अन्दर कोई त्रुटि नही है,लेकिन जिस सदस्य ने जन्म समय को बताया है उस सदस्य को भी अपने ऊपर यह भरोसा रखना चाहिये कि जो बताया गया है वह किस प्रकार से सही माना जा सकता है,जैसे अस्पताल में जन्म हुआ है तो जन्म कार्ड पर लिखा गया समय जन्म के पश्चात मिलने वाले कार्ड से होता है,हो सकता है जातक के जन्म के बाद डाक्टर अन्य कार्यों में लग गये हो और जातक का जन्म जिस समय हुआ था उसके लिये अन्दाज से अपने समय को बता रहे हो,या जातक का जन्म घर में हुआ है तो उस समय जातक के घर वाले प्रसूता की देखभाल में इतने लग गये हों कि जन्म समय को देखना ही भूल गये हों,आदि बाते देखनी बहुत जरूरी है। जन्म समय से लगन को शुद्ध रूप से समझा जा सकता है।


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